हिरोशिमा पर किए गए परमाणु हमले के 70 साल पूरे हो गए।

hiroshima

6 अगस्त, 1945 को अमरीका ने जापान के हिरोशिमा में पहला परमाणु बम ‘लिटल बॉय’ गिराया था, जिसके तीन दिन बाद उसने ऐसा एक और बम ‘फैट मैन’ फेंका। इसमें करीब 2 लाख लोग मारे गए।

जापान में रखा गया माैन
आज स्थानीय समयानुसार 8 बजे प्रधानमंत्री शिंजो एबे और विदेशी प्रतिनिधियों समेत कई लोगों ने मौन रखा। यह वही समय है, जब जापान के पश्चिमी शहर पर परमाणु बम से हमला बोलकर उसे तबाह कर दिया गया था। पहली बार वॉशिंगटन के एक वरिष्ठतम अधिकारी ने इस कार्यक्रम में शिरकत की।

PM मोदी ने किया ट्वीट
इस मौके पर पीएम मोदी ने ट्वीट किया, हिरोशिमा परमाणु हमले में जान गंवाने वालों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं। परमाणु बम हमला हमें युद्ध की भयावहता और मानवता पर उसके दुष्प्रभाव की याद दिलाता है। जापान के हिरोशिमा शहर के पीस पार्क में एक मशाल हमेशा जलती रहती है। जब तक दुनिया में व्यापक विनाश का एक भी हथियार है, यह मशाल जलती रहेगी।

कैसे खत्म हुअा था युद्ध
यह घटना दूसरे विश्वयुद्ध के अंतिम चरणों में से एक है। इसके आसपास की लगभग हर चीज जलकर खाक हो गई थी। इस बम के जरिए जमीनी स्तर पर लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी पहुंची थी, जोकि स्टील को पिघलाने के लिए काफी होती है। इनमें से कुछ लाेग जो बम हमले से बच गए थे, वाे भारी रेडिएशन की चपेट में आने के कारण बाद में मर गए थे। कुछ दिन बाद 15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया था और युद्ध समाप्त हो गया था।

परमाणु बम ने हिला दी थी दुनिया
कहा जाता है कि परमाणु बम का निर्माण 1941 में तब शुरू हुआ जब नोबेल विजेता वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अमरीकी राष्ट्रपति फ्रैंकलीन रूजवेल्ट को इस प्रोजेक्ट को फंडिंग करने के लिए राजी किया। उस समय खुद आइंस्‍टीन ने भी नहीं सोचा होगा कि इसके इतने घातक परिणामों हो सकते हैं। इस हमले ने पूरी दुनिया काे हिला कर रख दिया था।

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